लखनऊ में शव्वाल का चाँद नहीं दिखा, ईद-उल-फितर 21 मार्च को मनाई जाएगी

लखनऊ, 19 मार्च 2026: रमजान-उल-मुबारक के पवित्र महीने के समापन पर आज शाम शव्वाल का चाँद (ईद का चाँद) देखने की कोशिशें की गईं, लेकिन लखनऊ में यह नहीं दिखाई दिया। टीले वाली मस्जिद के शाही इमाम मौलाना कारी सैयद फजलुल मन्नान रहमानी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि चाँद की तस्दीक नहीं हुई है, इसलिए ईद-उल-फितर शनिवार, 21 मार्च 2026 को मनाई जाएगी।

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शाही इमाम ने बताया कि उन्होंने और अन्य लोगों ने दूरबीन की मदद से चाँद को देखने का प्रयास किया, लेकिन मौसम की स्थिति और अन्य कारणों से चाँद नजर नहीं आया। उन्होंने कहा, "राजधानी में चाँद नहीं दिखा है, इसलिए अब ईद शनिवार को मनाई जाएगी।" यह घोषणा मरकजी चाँद कमेटी फरंगी महल और अन्य स्थानीय चाँद कमेटियों के प्रयासों के अनुरूप है, जहाँ ईदगाह ऐशबाग सहित विभिन्न स्थानों पर चाँद की तलाश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।


भारत में ईद की तारीख आमतौर पर स्थानीय चाँद कमेटियों की घोषणा पर निर्भर करती है। सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में 18 मार्च को चाँद न दिखने के कारण वहाँ ईद शुक्रवार, 20 मार्च को मनाई जा रही है। भारत में भौगोलिक अंतर और समय के कारण चाँद दिखने की प्रक्रिया एक दिन बाद होती है। आज 19 मार्च को दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई और अन्य प्रमुख शहरों में भी चाँद नजर नहीं आने की खबरें आ रही हैं, जिससे अधिकांश क्षेत्रों में ईद 21 मार्च (शनिवार) को ही मनाने की संभावना मजबूत हो गई है।


रमजान के 30 रोजे पूरे होने के बाद ईद-उल-फितर का यह त्योहार मुसलमानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन सुबह ईद की नमाज अदा की जाती है, सदका-ए-फितर दिया जाता है, रिश्तेदारों-मित्रों से मिलकर खुशियाँ बाँटी जाती हैं और बच्चों को ईदी दी जाती है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में बादलों और हल्की बारिश की संभावना के कारण चाँद दिखने में कठिनाई हुई।


मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली सहित अन्य उलेमा ने भी चाँद न दिखने की पुष्टि की है। यदि किसी अन्य क्षेत्र से चाँद की तस्दीक होती है, तो स्थानीय कमेटियाँ अलग घोषणा कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान में पूरे उत्तर भारत और अधिकांश देश में 21 मार्च को ईद मनाने का आम सहमति है।

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